August 30, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (3 मार्च) को यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता पर रोक लगाने का आदेश दिया. यह आदेश यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ ओवल ऑफिस में हुई झड़प के कुछ ही दिनों बाद आया है. ब्लूमबर्ग ने रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका यूक्रेन को दी जाने वाली सभी मौजूदा सैन्य सहायता तब तक रोक रहा है, जब तक ट्रंप यह तय नहीं कर लेते कि जेलेंस्की शांति के लिए सद्भावनापूर्ण प्रतिबद्धता रखते हैं या नहीं. ओवल ऑफिस में हुई बैठक में जेलेंस्की ने रूस के साथ किसी भी शांति समझौते को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा गारंटी की मांग की. इस पर ट्रंप ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब यूक्रेन शांति के लिए तैयार होगा, तभी वह वापस आएं. इस तनावपूर्ण बैठक के बाद यूरोपीय सहयोगियों ने तेजी से यूक्रेन को हथियार उपलब्ध कराने और शांति सैनिक भेजने की योजना बनानी शुरू कर दी. डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए शांति समझौते पर जोर दे रहे हैं. हालांकि, जेलेंस्की की ओर से सुरक्षा की मांग ने इस समझौते को जटिल बना दिया है. ट्रंप ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि जब तक शांति समझौते की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तब तक अमेरिका से कोई सहायता नहीं मिलेगी. अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के आदेश से कितनी सैन्य सहायता प्रभावित होगी. पिछले प्रशासन से बची हुई $3.85 बिलियन की धनराशि को लेकर ट्रंप प्रशासन अनिश्चितता में है कि इसे यूक्रेन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा या नहीं. इस रोक के कारण पहले से निर्धारित अनुबंध और हथियार डिलीवरी भी खतरे में आ गई हैं, जिसमें महत्वपूर्ण युद्ध सामग्री और एंटी-टैंक हथियार शामिल हैं. ट्रंप के इस आदेश के बाद, यूरोपीय सहयोगियों ने यूक्रेन की मदद के लिए अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है. हालांकि यूरोप के पास अमेरिका के समान सैन्य संसाधन नहीं हैं, वे जल्द से जल्द सहायता प्रदान करने के प्रयास में हैं. यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि यूक्रेन को दी जा रही हथियारों की आपूर्ति सिर्फ गर्मियों तक चल सकेगी. अमेरिका का फैसला केवल यूक्रेन को दी जा रही को आर्थिक मदद खत्म करने से कहीं अधिक है. यह पहले से वितरित की जा रही महत्वपूर्ण सैन्य सहायता को भी खतरे में डालता है. इसके अलावा, अमेरिका और यूक्रेन के बीच एक समझौता होने वाला था, जिसके तहत अमेरिका को यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों से भविष्य में होने वाली आय का बड़ा हिस्सा मिलना था. हालांकि, शुक्रवार की बैठक के बाद यह समझौता टूटता हुआ दिखाई दिया।

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