
पाकुड़। झारखंड के पाकुड़ जिले को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला ‘पलटन’ ब्रिज का एप्रोच रोड खतरे में है। गुरुवार सुबह से इस महत्वपूर्ण पुल का एप्रोच रोड धंसना शुरू हो गया है, जिससे पाकुड़ जिले की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। यह पुल गंगा नदी के फीडर कैनाल पर बना है और चांदपुर तथा डाक-बंगला के बीच स्थित है। यह रास्ता पाकुड़ जिले के लिए एक ‘लाइफलाइन’ माना जाता है। प्रतिदिन पाकुड़ का मशहूर पत्थर लोड कर कम से कम दो सौ बड़े वाहन इसी रास्ते से बंगाल, बिहार और बांग्लादेश के लिए रवाना होते हैं। इस भारी परिवहन से झारखंड राज्य सरकार को अनुमानित प्रतिदिन लगभग 30 से 40 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। अगर यह मार्ग पूरी तरह से बाधित हो जाता है, तो राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान होगा।

अन्य व्यापार पर भी पड़ सकता है बुरा असर

सिर्फ पत्थर का कारोबार ही नहीं, पाकुड़ के कई अन्य छोटे-बड़े व्यवसाय भी पश्चिम बंगाल के बाजारों पर निर्भर करते हैं। चांदपुर, डाक-बंगला, धुलियान, जंगीपुर, बरहमपुर, औरंगाबाद और कालियाचौक जैसे प्रमुख बाजारों से पाकुड़ का सीधा व्यापारिक संबंध है। पुल के एप्रोच रोड के धंसने से इन व्यवसायों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को इस स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि इस महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से सुचारू किया जा सके और होने वाले आर्थिक नुकसान को रोका जा सके।

