रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची ने फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर प्राप्त नामांकन के एक मामले में त्वरित एवं महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वर्ष 2025 बैच के एमबीबीएस छात्र आशीष कुमार का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।प्राप्त शिकायत के आलोक में रिम्स प्रबंधन द्वारा संबंधित अभिलेखों की सत्यता की जांच हेतु साहेबगंज के उपायुक्त को पत्र प्रेषित किया गया था। जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच के उपरांत प्राप्त प्रतिवेदन में अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी से संबंधित प्रस्तुत प्रमाणपत्र को फर्जी पाए जाने की पुष्टि की गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर संस्थान द्वारा नियमानुसार छात्र का नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई की गई।रिम्स प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा फर्जी दस्तावेजों के उपयोग के प्रति संस्थान की जीरो टॉलरेंस नीति है। प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं वैधानिकता सुनिश्चित करना संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में नियमों के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी।

रिम्स परिसर के पुनर्विकास को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित, पुराने भवनों के पुनर्निर्माण की कार्ययोजना पर हुई चर्चा
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में रिम्स परिसर के पुनर्विकास से संबंधित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संयुक्त सचिव सह निदेशक, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन दिनेश यादव (भा.प्र.से.), रिम्स के कार्यकारी निदेशक, चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में रिम्स परिसर के समग्र पुनर्विकास की दिशा में चयनित पुराने भवनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर आधुनिक एवं उन्नत स्वास्थ्य अवसंरचना विकसित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
समीक्षा के दौरान पुराने बीएसएनएल कार्यालय भवन, सीनियर रेजिडेंट (एसआर) क्वार्टर तथा फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी (एफएमटी) विभाग के वर्तमान भवन को ध्वस्त कर पुनर्निर्माण किए जाने के प्रस्ताव की समीक्षा की गई। इन भवनों की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति, सुरक्षा संबंधी पहलुओं तथा भविष्य की अधोसंरचना आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध भूमि के बेहतर उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की सेवाएं वर्तमान में नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। प्रस्तावित पुनर्विकास योजना के अंतर्गत विभाग के पुराने भवन के स्थान पर उसी परिसर में एक आधुनिक एवं अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन निर्मित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराना, विभागीय सुविधाओं का विस्तार करना तथा रिम्स में मरीजों को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित पुनर्विकास कार्यों से संबंधित सभी तकनीकी, प्रशासनिक एवं वैधानिक औपचारिकताएं निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप शीघ्र पूर्ण की जाएं, ताकि परियोजनाओं का क्रियान्वयन सुनियोजित एवं समयबद्ध तरीके से प्रारंभ किया जा सके।
