
नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक के विरोध में जुलाई में हुए प्रदर्शनों को लेकर छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह मामला विशेष परिस्थितियों में अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल के योग्य है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इन्हीं घटनाओं को लेकर किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में ऐसी कोई अन्य FIR दर्ज है, जिसे अदालत के सामने पेश नहीं किया गया है, तो उस पर भी आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नए सिरे से कार्रवाई करने की छूट दी है, जिनके बारे में पुलिस ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने का दावा किया है। इस संबंध में प्रभावित लोगों को कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार भी रहेगा।
मामला जुलाई में NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुए देशव्यापी प्रदर्शनों से जुड़ा है। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के संबंध में पुलिस ने पहले 13 FIR दर्ज की थीं। बाद में केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया था। इसी के बाद दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन मामलों को खत्म करने की अनुमति मांगी थी।
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर से भी संबंधित FIR को खत्म करने के लिए आवेदन दिए गए हैं। अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 20 से 25 जुलाई की घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज करने से भी रोक दिया है।
5 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन भी वापस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद NEET प्रदर्शन से जुड़े संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया। संगठन ने प्रदर्शन वापस लेने के पीछे केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रमुख वजह बताया।
सुनवाई के दौरान NEET विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने केंद्र को इस संबंध में मुआवजे की व्यवस्था तैयार करने के लिए तीन महीने का समय दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनके खिलाफ जुलाई के NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रदर्शन की आड़ में गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता खुला रहे।
