

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मानसून के बीच डेंगू के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। राज्य में अब तक 4,000 से अधिक लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, जबकि बीमारी से सात मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। हालांकि, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि फिलहाल राज्य में स्थिति नियंत्रण में है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 अगस्त तक राज्य में डेंगू के कुल 4,035 मामले दर्ज किए गए थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 7,600 से अधिक थी। उन्होंने इस साल मामलों में कमी का श्रेय लोगों के बीच बढ़ी जागरूकता और प्रशासन की सक्रियता को दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेंगू की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और नवंबर तक निगरानी जारी रखने की जरूरत है। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न नगर निकायों के अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में बीमारी की रोकथाम और मच्छरों के प्रजनन को रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।
पांच जिलों को डेंगू के लिहाज से संवेदनशील माना गया
राज्य सरकार ने डेंगू के लिहाज से कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद को सबसे संवेदनशील जिलों के रूप में चिन्हित किया है। इन क्षेत्रों में निगरानी और मच्छर नियंत्रण अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि 16 अगस्त तक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में डेंगू के मामलों में करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि, उन्होंने लगातार हो रही बारिश को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन के नए ठिकाने बन सकते हैं।
कोलकाता में भी बढ़ी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 23 अगस्त के बीच कोलकाता में डेंगू के 327 मामले सामने आए। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 387 थी। शहर और आसपास के इलाकों में डेंगू की रोकथाम के लिए नगर निगम और मेट्रो प्रशासन ने संयुक्त अभियान भी शुरू किया है।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे घरों की छतों, गैराज, बगीचों और ऐसे स्थानों की नियमित जांच करें जहां बारिश का पानी जमा हो सकता है। पुराने गमलों, कंटेनरों और अन्य बर्तनों में जमा पानी को हटाने पर भी जोर दिया गया है, क्योंकि ये मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकते हैं।
सरकार ने अपने विभागों के भवनों और नगर निगम परिसरों में भी मच्छरों के प्रजनन की संभावित जगहों की जांच के निर्देश दिए हैं। सिंचाई और लोक निर्माण विभागों को नालों और जल निकासी से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए भी सक्रिय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश के मौसम में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए निगरानी और रोकथाम के उपाय जारी रखे जाएंगे।

