

गोड्डा: झारखंड में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर गोड्डा जिले में विवाद गहराता जा रहा है। The Indian Express की पड़ताल के मुताबिक, जिले के कुछ बूथों पर BJP के Booth Level Agents (BLA) बड़ी संख्या में Form 7 लेकर पहुंचे, जिनके जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई। इन आवेदनों में बड़ी संख्या अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की बताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम चार बूथों पर Booth Level Officers (BLO) ने कुछ आवेदनों को स्वीकार करने से इनकार किया। अधिकारियों ने इन फॉर्मों की वैधता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद BJP की ओर से BLO की भूमिका पर आपत्ति जताई गई और मामला अब जिला स्तर से होते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक पहुंच गया है।
एक बूथ पर 25, दूसरे पर 75 Form 7
गोड्डा के महेश्तिकरी गांव के बूथ नंबर 9 पर BJP BLA संजीव कुमार रोशन ने 25 मतदाताओं के खिलाफ Form 7 जमा किए। The Indian Express ने इनमें से आठ मतदाताओं से बातचीत की। इन लोगों ने आशंका जताई कि अगर उनका नाम मतदाता सूची से हटता है तो इसका असर उनके मतदान के अधिकार के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के लाभ पर भी पड़ सकता है।
वहीं, पड़ोसी बूथ पर एक BLA करीब 75 Form 7 लेकर पहुंचा। BLO द्वारा इन फॉर्मों को लेकर सवाल पूछे जाने के बाद BLA ने कथित तौर पर सभी फॉर्म वहीं जला दिए। संबंधित BLA ने बाद में कहा कि उसे इन फॉर्मों की पूरी जानकारी नहीं थी और BJP कार्यकर्ताओं ने उसे इन्हें BLO के पास जमा करने के लिए दिया था।
2003 की मतदाता सूची में भी दर्ज हैं कई नाम
मामले की एक अहम बात यह सामने आई कि जिन कई मतदाताओं के नाम हटाने की आपत्ति दर्ज की गई, वे लंबे समय से गांव में रह रहे हैं। इनमें से कई लोगों के नाम 2003 की गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में भी दर्ज पाए गए हैं। SIR के मौजूदा नियमों के तहत 2003 की सूची में मौजूद रिकॉर्ड इन मतदाताओं की स्थिति को प्रमाणित करने में मदद कर सकता है।
महेश्तिकरी की BLO अनीशा बानो ने बताया कि BJP के एक BLA ने उन्हें करीब 25 Form 7 दिए थे। उनके मुताबिक, BLA ने कहा था कि ये ऐसे मतदाताओं के फॉर्म हैं जो गांव में मौजूद नहीं हैं। बानो ने बताया कि सभी फॉर्म मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित थे और इनमें से संबंधित मतदाताओं के नाम 2003 की सूची से भी जुड़े थे।
पचुआ किता के BLO मुख्तार ने भी करीब 75 फॉर्म मिलने की बात कही। उनके अनुसार, ये फॉर्म उन आधिकारिक फॉर्मों से अलग थे जो ब्लॉक कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने BLA से फॉर्म के उद्देश्य के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि इसका इस्तेमाल नाम जोड़ने के लिए किया जाएगा, जबकि वास्तव में Form 7 किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होता है।
मतदाताओं में डर
महेश्तिकरी के कई लोगों ने प्रशासन को शिकायत देकर अपने नाम हटाने की कोशिश पर चिंता जताई है।
70 वर्षीय अब्दुल मन्नान खान का कहना है कि उनका परिवार पीढ़ियों से गांव में रह रहा है और उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में भी था। इसी तरह मोहम्मद नौशाद ने बताया कि उनके दादा-दादी के नाम पुराने रिकॉर्ड में दर्ज हैं और वह रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाते रहे हैं, लेकिन मतदान झारखंड में ही करते हैं।
80 वर्षीय मोहम्मद शफीक ने कहा कि वह 18 साल की उम्र से इस क्षेत्र में मतदान करते रहे हैं। उनके परिवार के पास जमीन और स्थानीय निवास से जुड़े दस्तावेज भी हैं। उनकी पत्नी बीबी बसीलन ने आशंका जताई कि ऐसी कार्रवाई से उनके परिवार के सामने गंभीर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
कुछ अन्य ग्रामीणों ने भी इसी तरह की चिंता जाहिर की। मोहम्मद असलम ने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि वे इस क्षेत्र के निवासी नहीं हैं। वहीं, शमीम को अपने खिलाफ Form 7 दाखिल होने की जानकारी एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के जरिए मिली।
BJP ने कहा- Form 7 दाखिल करना BLA की जिम्मेदारी का हिस्सा
27 अगस्त को BJP के झारखंड SIR संयोजक राकेश प्रसाद ने Additional CEO को ज्ञापन देकर SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की शिकायत की। पार्टी ने खासतौर पर साहिबगंज और गोड्डा का मुद्दा उठाया। BJP का आरोप है कि कुछ BLO ने उसके BLAs द्वारा दिए गए Form 7 स्वीकार नहीं किए।
पूर्व BJP विधायक अमित कुमार मंडल ने कहा कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज होने की स्थिति में BLA आपत्ति दर्ज करा सकता है। उनके मुताबिक, Form 7 की संख्या को लेकर कोई निर्धारित सीमा नहीं है और आपत्तियों की जांच करना चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
प्रशासन करेगा फील्ड वेरिफिकेशन
बासंतराय के BDO और Electoral Registration Officer श्रीमन मरांडी ने कहा कि उन्हें महेश्तिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बघाकोल के चार बूथों से शिकायतें मिली हैं। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी और हर डिलीशन रिक्वेस्ट का फील्ड वेरिफिकेशन कराया जाएगा।
हालांकि, झारखंड के Chief Electoral Officer के. रवि कुमार ने कहा कि Form 7 के जरिए आपत्ति दर्ज कराना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है और ऐसे आवेदन एक साथ भी जमा किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी BLA को लगता है कि कोई मतदाता एक से अधिक राज्यों में पंजीकृत है, तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है।
CEO ने BLOs द्वारा फॉर्म सीधे खारिज किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, BLO को पहले मामला AERO के सामने रखना चाहिए, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई और BLO की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए।
SIR में पहले ही हट चुके हैं करीब 43 लाख नाम
झारखंड में SIR की प्रक्रिया 30 जून से शुरू हुई थी। 5 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 43 लाख नाम हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का लगभग 16.48 प्रतिशत है। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 4 सितंबर तक जारी रहेगी।
Form 7 के जरिए किसी मतदाता का नाम मृत होने, स्थानांतरित होने, एक से अधिक जगह दर्ज होने या भारतीय नागरिक न होने जैसे आधारों पर हटाने की मांग की जा सकती है। फॉर्म जमा करने वाले व्यक्ति को अपने दावे की सत्यता को लेकर घोषणा भी करनी होती है।
इस पूरे विवाद ने झारखंड में SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। JMM के स्थानीय नेता सुल्तान अहमद ने आरोप लगाया कि इन फॉर्मों के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि वह SIR के दौरान Form 7 के जरिए होने वाली संभावित लक्षित डिलीशन पर नजर रख रही है।

