
लातेहार: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर दिन गुरुवार को जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन बाजकुम स्थित सरस्वती शिशु-विद्या मंदिर परिसर में ‘राधा-कृष्ण रूप सज्जा कार्यक्रम समारोह-2026’ का आयोजन उत्साह और भक्तिमय वातावरण में किया गया। समारोह में कक्षा अरुण से द्वितीय तक के नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों ने राधा-कृष्ण का रूप धारण कर अपनी आकर्षक प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अंतरा पाठक की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद बच्चों ने राधा-कृष्ण के विभिन्न रूपों में सजकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
मुकुट, मोरपंख और बांसुरी बने आकर्षण
राधा-कृष्ण की वेशभूषा में सजे बच्चों का रूप देखते ही बन रहा था। नन्हे कृष्णों के सिर पर मुकुट और मोरपंख, हाथों में बांसुरी तथा राधा के रूप में सजी बच्चियों का पारंपरिक श्रृंगार समारोह का विशेष आकर्षण रहा।बच्चों की मासूमियत और आकर्षक रूप-सज्जा ने विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल बना दिया।
प्रतियोगिता में बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। उनके रूप-सज्जा और प्रस्तुति ने उपस्थित अभिभावकों एवं शिक्षकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।कार्यक्रम के अंत में निर्णायक मंडली ने विभिन्न प्रतिभागियों में से प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किया। इसके साथ ही प्रतियोगिता में शामिल सभी 43 प्रतिभागियों को भी सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के उद्देश्य से सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया। इन बच्चों को विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सरयू प्रसाद सिंह व विद्यालय के प्रधानाचार्य राजबल्लम शर्मा ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली।
कक्षा अरुण की जिम्मेदारी पूजा कुमारी, कक्षा उदय की रिंकी, कक्षा प्रभात की खुशबू कुमारी, कक्षा प्रथम की श्वेता तथा कक्षा द्वितीय की खुशबू राठौर ने संभाली। विद्यालय के सभी आचार्यों एवं दीदी जी ने आयोजन में सहयोग किया।
समारोह की फोटोग्राफी एवं छायांकन की जिम्मेदारी धनंजय आचार्य ने संभाली। आयोजन के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया गया।कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधानाचार्य राजबल्लम शर्मा के कुशल नेतृत्व के साथ विद्यालय के आचार्यों एवं दीदी जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।



