August 28, 2026

नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 मंगलवार को उड़ान के दौरान अचानक तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। हवा में आए जोरदार झटकों के कारण विमान कुछ समय के लिए अस्थिर हो गया और यात्रियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, पायलट ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा और विमान को सुरक्षित तरीके से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतार दिया। इस घटना में कुल 12 लोग घायल हुए हैं, जिनमें यात्री और क्रू सदस्य दोनों शामिल बताए जा रहे हैं। विमान सामान्य उड़ान भर रहा था, तभी अचानक मौसम में बदलाव और तेज वायु प्रवाह के कारण टर्बुलेंस उत्पन्न हुआ। विमान को कई बार तेज झटके लगे, जिससे कुछ यात्री अपनी सीटों पर उछल गए। जिन लोगों ने सीट बेल्ट नहीं बांधी थी, उन्हें अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। विमान के अंदर मौजूद सामान भी इधर-उधर बिखर गया और कई यात्रियों में घबराहट फैल गई। घटना के बाद विमान के भीतर की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें विमान की सीलिंग के पैनल में दरारें दिखाई दे रही हैं। कुछ हिस्सों के पैनल अपनी जगह से ढीले भी नजर आए। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि झटके काफी तेज थे। हालांकि, विमान की मुख्य संरचना सुरक्षित रही और पायलट ने सभी आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए विमान को सुरक्षित दिल्ली पहुंचाया। दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान के उतरते ही मेडिकल टीम को तुरंत बुलाया गया। घायलों को एयरपोर्ट मेडिकल सेंटर में प्राथमिक उपचार दिया गया। कुछ यात्रियों को आंख, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों में हल्की चोटें आईं। एक केबिन क्रू सदस्य की गर्दन में चोट लगने के कारण उसे नेक ब्रेस पहनाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद कुछ घायलों को आगे की जांच के लिए अस्पताल भी भेजा गया। एयर इंडिया ने कहा है कि सभी प्रभावित यात्रियों और क्रू सदस्यों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। एअर इंडिया ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि विमान ने सुरक्षित लैंडिंग की और घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा तकनीकी और परिचालन संबंधी सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल घटना के कारणों की जांच की जा रही है। टर्बुलेंस विमान यात्रा का एक सामान्य लेकिन कभी-कभी गंभीर अनुभव माना जाता है। इसका अर्थ है कि हवा का बहाव अचानक बदल जाता है, जिससे विमान ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिलने लगता है। कई बार विमान कुछ मीटर नीचे भी आ जाता है, जिससे यात्रियों को ऐसा महसूस होता है कि विमान गिर रहा है। हालांकि अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता और प्रशिक्षित पायलट स्थिति को नियंत्रित कर लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, विमान के पंखों के ऊपर और नीचे हवा का संतुलित प्रवाह उड़ान को स्थिर बनाए रखता है। जब मौसम में बदलाव, तेज हवाएं, बादलों की गतिविधि या वायु दबाव में अचानक परिवर्तन होता है, तब एयर पॉकेट्स बनते हैं और टर्बुलेंस पैदा होता है। आधुनिक मौसम रडार और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की सहायता से पायलट अक्सर ऐसे क्षेत्रों से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में अचानक टर्बुलेंस से बचना संभव नहीं होता। टर्बुलेंस को उसकी तीव्रता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। हल्के टर्बुलेंस में विमान मामूली हिलता है और यात्रियों को बहुत कम महसूस होता है। मध्यम टर्बुलेंस में विमान कुछ मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है, जिससे सीट पर बैठे यात्रियों को झटका महसूस होता है। गंभीर टर्बुलेंस के दौरान विमान को काफी तेज झटके लगते हैं और यदि सीट बेल्ट नहीं लगी हो तो यात्री अपनी सीट से उछल सकते हैं। ऐसे मामलों में चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है।

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