रांची। केन्द्र की सरकार द्वारा लोकसभा और राज्य सभा दोनों सदनों से खान खनिज विकास और विनियमन अधिनियम, 1957 में हुए संसोधन किये जाने के बाद झामुमो के केन्द्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने केंद्र सरकार पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि केन्द्र की सरकार हमें अस्सी के दशक में जाने पर मजबूर ना करे, पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि केन्द्र की सरकार को याद रखना चाहिए कि कैसे अस्सी के दशक में आर्थिक नाकेबंदी हुई थी। विनोद पांडेय ने कहा कि केन्द्र की सरकार ने एक साजिश के तहत 12 अगस्त को आनन फानन में पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में एमएमडीआर बिल पेश कर दिया और उसे बगैर किसी चर्चा के सदन से पारित करवा दिया। झामुमो ने कहा कि केन्द्र की सरकार ने किसी भी राज्य से कुछ भी राय लेना उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक से सीधे तौर पर वैसे राज्य जहां पर खनिज संपदा है जहां खनन का काम चलता है सीधे प्रभावित होगा। झारखंड ऐसा राज्य है जो खनिज से भरा है और पूरी तरह से यहां के लोग यहां की सरकार उस विधेयक से प्रभावित होंगे। विनोद पांडेय ने कहा कि हम केन्द्र सरकार से सीधे सवाल करते हैं कि इस विधेयक को पास करने के पहले राज्यों से चर्चा क्यों नहीं की गयी। हजारों करो़ड रूपये का जो नुकसान होगा उसकी भरपाई कौन करेगा। यह भी बताना होगा कि जमीन हमारी जायेगी, खनिज हमारा निकाला जायेगा। क्या हमारे लोग धूल फांकेंगे। विनोद पांडेय ने कहा कि इस विधेयक से झारखंड को सीधे तौर पर 15 हजार करोड़ का नुकसान होगा। एक लाख 26 हजार करोड़ रुपया बकाया जो अब बढकर एक लाख 60 हजार करोड़ रुपया पहुंच गया होगा से भी वंचित करने की कोशिश की गयी। विनोद पांडेय ने चेतावनी देते हुए कहा कि खनिज झारखंड का है, जमीन झारखंड की है लिहाजा हमारा फैसला दिल्ली से नहीं होगा। यह विधेयक झारखंड के अधिकार को काटने की कोशिश है बिल्कुल उसी तरह जैसे किसी इंसान के हाथ पैर काट दिये जाये। विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा हमारे जनादेश को पचा नहीं पा रही है लिहाजा वह इस तरह के विधेयक लाकर राज्य के विकास का रोकने का प्रयास कर रही है। विनोद पांडेय ने कहा कि उक्त काले विधेयक का झारखंड मुक्ति मोरचा कड़े शब्दों में विरोध करती है निंदा करती है। इसके लिए झामुमो चरणबद्ध आंदोलन चलाने के लिए तैयार है।

